Saturday, November 24, 2012

हनुमत वन्दन

ज्ञान के निधन भगवान् अंजनी  सपूत ,
क्षण भर में क्षार करें विपदाएं हन्त  की।
ध्यान के वितान श्रीराम के प्रधान दूत,
रोग शोक हरें सभी पीड़ायें  संत की।

ज्ञान के अजान श्रीमान शक्ति में अकूत,
गिरिधर की ख्याति भक्ति चर्चा अनंत की।
गान के विहान हनुमान यश कीर्ति सूत,
दुःख दैन्य दूर करें व्याधि आदि अंत की।

दान में महान सम्मान के सुजान सेतु,
सेवा में लीन सदा सीता के कन्त की।
भान  में प्रधान कांतिवान शुद्ध अवधूत,
वज्र अंग ध्यान मग्न शोभा श्रीमंत की।

यान के समान पवमान के प्रसून पूत,
पल भर में पार करें दूरियां दिगंत की।
मान के निदान स्वाभिमान की सुरक्षा हेतु,
आदि से अनंत है छलांग हनुमंत की।





 

माँ मुझे वरदान दे।

माँ मुझे वरदान दे।

निज भक्ति का,
शिव शक्ति का,
अनुरक्ति का मधुपान दे।

माँ मुझे वरदान दे।

शुभ कर्म का,
ऋषि धर्म का,
श्रुति मर्म का रसगान दे।

माँ मुझे वरदान दे।

शुचि ध्यान का,
रूचि ज्ञान का,
अनुमान का प्रतिमान दे।

माँ मुझे वरदान दे।

तव चित्र का,
चिर  मित्र का,
सुपवित्र का सम्मान दे।

माँ मुझे वरदान दे।

सद्बुद्धि का,
श्री वृद्धि का
सुसम्रिद्धि का अनुदान दे।

माँ मुझे वरदान दे।