ज्ञान के निधन भगवान् अंजनी सपूत ,
क्षण भर में क्षार करें विपदाएं हन्त की।
ध्यान के वितान श्रीराम के प्रधान दूत,
रोग शोक हरें सभी पीड़ायें संत की।
ज्ञान के अजान श्रीमान शक्ति में अकूत,
गिरिधर की ख्याति भक्ति चर्चा अनंत की।
गान के विहान हनुमान यश कीर्ति सूत,
दुःख दैन्य दूर करें व्याधि आदि अंत की।
दान में महान सम्मान के सुजान सेतु,
सेवा में लीन सदा सीता के कन्त की।
भान में प्रधान कांतिवान शुद्ध अवधूत,
वज्र अंग ध्यान मग्न शोभा श्रीमंत की।
यान के समान पवमान के प्रसून पूत,
पल भर में पार करें दूरियां दिगंत की।
मान के निदान स्वाभिमान की सुरक्षा हेतु,
आदि से अनंत है छलांग हनुमंत की।
क्षण भर में क्षार करें विपदाएं हन्त की।
ध्यान के वितान श्रीराम के प्रधान दूत,
रोग शोक हरें सभी पीड़ायें संत की।
ज्ञान के अजान श्रीमान शक्ति में अकूत,
गिरिधर की ख्याति भक्ति चर्चा अनंत की।
गान के विहान हनुमान यश कीर्ति सूत,
दुःख दैन्य दूर करें व्याधि आदि अंत की।
दान में महान सम्मान के सुजान सेतु,
सेवा में लीन सदा सीता के कन्त की।
भान में प्रधान कांतिवान शुद्ध अवधूत,
वज्र अंग ध्यान मग्न शोभा श्रीमंत की।
यान के समान पवमान के प्रसून पूत,
पल भर में पार करें दूरियां दिगंत की।
मान के निदान स्वाभिमान की सुरक्षा हेतु,
आदि से अनंत है छलांग हनुमंत की।
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