एक गीत मेरा भी अपने अधरों से तुम छू कर देखो
इसमें तुमको प्रीति-रीति, रस, वाणी को श्रृंगार मिलेगा
मेरे प्राण, ह्रदय की बातें,
तुमसे कहने को तरसे हैं.
उमस भरे, मेरे अंतर के,
पावस घन उमडे बरसे हैं.
चटक, मोर, चकोर, न जाने,
कबसे मेरी बात कह रहे.
इनको सुनो, गुणों, पहचानो तुमको भी अभिसार मिलेगा
मेरी आँखों में झांको तो,
अपनी ही छवि तुम्हे मिलेगी.
विश्वासों का संबल रख लो,
नींव प्यार की नहीं हिलेगी.
शब्द-सुमन की यह वरमाला,
अपने गले लगा कर देखो.
तुमको खरे जल के मोती, सीपों को उदगार मिलेगा
मेरे, तेरे, इसके, उसके
सबके जीवन की परिभाषा
एक दूसरे से मिलजुल कर
सुख पाने वाली अभिलाषा
प्रकृति-पुरुष की रची बसी इस
संसृति को अंचल में भर लो
जन्म-जन्म की प्यास बुझेगी, प्यार भरा आधार मिलेगा
तंत्र, मंत्र, मोहन, उच्चाटन
शब्द-शक्ति प्रेरित होते हैं
व्यथित-ह्रदय के करूँ स्वरों में
विरह-गीत गुप-चुप रोते हैं
तुम कलकंठ कूक कोयल की
हूक पपीहे वाली भर दो
प्रेमी उर की चंचलता को धड़कन का अधिकार मिलेगा
इस छंभंगुर जग में हम तुम,
साथ हमेशा नहीं रहेंगे;
फिर कैसे तुमसे हम अपने,
मन प्राणों की बात कहेंगे
अपने स्वर के गंगाजल से,
शब्द-शब्द अभिसिंचित कर दो
प्राण प्रतिष्ठित होकर इनको अजर-अमर संसार मिलेगा
एक गीत मेरा भी अपने अधरों से तुम छू कर देखो
इसमें तुमको प्रीति-रीति, रस, वाणी को श्रृंगार मिलेगा
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