उषा की लाली से उतरी देवी क्या तुम ओमवती हो?
इस सद्यःस्नाता छवि में
तुम सहज सलोनी रूपवती हो
या इस संगम तट पर प्रकटी
गंगा, यमुना, सरस्वती हो?
अर्ध्य दे रही सूर्य देव को,
बिखरे कच लग रही यति हो
सुन्दर धूप रूप यौवन की
तन्वंगी शुची सौम्य सटी हो
राज नल की दमयंती या
रत्नसेन की रूपमती हो?
आख्यानों की अमरबेलि तुम,
दीपशिखा जैसी दिखती हो
सावित्री तुम सत्यवान की
कालजयी अत शीलवती हो
अथवा तुम अनंग से बिछड़ी
एकाकी रम रही रति हो
स्वयं अपर्णा सी काया में
तुम तो जैसे पार्वती हो
कौन गरलपायी शंकर है
किसकी तुम सौभाग्यवती हो
उषा की लाली से उतरी, देवी क्या तुम ओमवती हो?
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